सारी सीमाओं से परे... फिर भी एक दूसरे में समाया हुआ.. एक दूसरे को जीता हुआ....! सारी सीमाओं से परे... फिर भी एक दूसरे में समाया हुआ.. एक दूसरे को जीता हुआ....!
मधु मिश्रा. ओडिशा. (प्रत्येक रचना उपजती है हमारे आसपास के दायरों से ही जो दे जाती है मधु मिश्रा. ओडिशा. (प्रत्येक रचना उपजती है हमारे आसपास के दायरों से ही जो दे...
आराम कुर्सी पर बैठे हुए मिस्टर सिंह को एक उदासी ने आ घेरा| उदासी आये भी क्यों न? उन्हें पता था अब से... आराम कुर्सी पर बैठे हुए मिस्टर सिंह को एक उदासी ने आ घेरा| उदासी आये भी क्यों न?...
बरसात तो हर साल आती है..पर वो अब कभी नहीं आएगी.. बरसात तो हर साल आती है..पर वो अब कभी नहीं आएगी..
मैं भारत का छात्र हूँ विद्यालय मेरा मंदिर है, शिक्षा है मेरा संस्कार, सहपाठी और शिक मैं भारत का छात्र हूँ विद्यालय मेरा मंदिर है, शिक्षा है मेरा संस्कार, ...
अनजान समझा जिन्हें, वो मेरा अपना ही था। दर्द गहरे थे उनको, जख्म अपना ही था।। अनजान समझा जिन्हें, वो मेरा अपना ही था। दर्द गहरे थे उनको, जख्म अपना ही...